मातम के हूँ ज़मीन पे ख़िर्मन तो क्या अजब
होता है नील चर्ख़ की उस सब्ज़ किश्त में
“My mourning on the earth, what a strange spectacle it is,”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
धरती पर मेरा शोक और मातम, तो ख़िर्मन क्या अजब होता है, उस हरी सवारी में नीले चक्र की।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी और गम के गहरे रहस्य को बयान करता है। शायर कहते हैं कि अगर हम ज़मीन पर मातम मना रहे हैं, तो कोई अजब बात नहीं है। जो अजीब है, वो तो उस नीले चक्के वाली, हरी किश्त में है। यह किश्त हमारी ज़िंदगी का सफ़र है, जो नियति और क़िस्मत के चक्र को दिखाता है। शायर कहते हैं कि हमारे ग़म हमारे सफ़र का ही हिस्सा हैं।
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