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गर कुछ हो दर्द आईना यूँ चर्ख़-ए-ज़िश्त में इन सूरतों को सिर्फ़ करे ख़ाक-ओ-ख़िश्त में

If anything painful happens, in the mirror of life's wheel, These faces will only be reduced to dust and ashes.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर कोई दर्दनाक बात हो, तो जीवन के इस चक्के (चक्र) के आईने में, ये चेहरे केवल धूल और राख बन जाएंगे।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी की नश्वरता और दर्द की गहराई को समझाता है। शायर कहते हैं कि दर्द कोई साधारण घाव नहीं है, यह तो एक आईना है जो जीवन के चक्र में घूम रहा है। और ये सूरतें... ये चेहरे, कितने नाज़ुक हैं कि इन्हें मिटाने के लिए तो बस धूल और राख काफी है। एक बहुत ही गहरा एहसास है कि सब कुछ एक दिन बस राख हो जाएगा।

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