हमेशा कौन तकल्लुफ़ है ख़ूब-रूयों का — मीर तक़ी मीर

हमेशा कौन तकल्लुफ़ है ख़ूब-रूयों का गुज़ार नाज़ से ईधर भी गाह गाह करें

“Always, what pretense is it for beautiful faces, Keep indulging in charm, sighing this way and that.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

खूबसूरत चेहरों का हमेशा इतना दिखावा क्यों होता है? नाज़ से ऐसे ही इतराते रहो और हर तरफ आहें भरते रहो।

विस्तार

यह शेर सिर्फ शिकायत नहीं है, बल्कि एक इद्दत (complaint) भरी शरारत है! शायर कहते हैं कि खूबसूरत चेहरों को लेकर हमेशा इतना हंगामा क्यों? और फिर वो अपने महबूब से कहते हैं कि अगर नाज़ करना ही है, तो इस दूरी से भी नाज़ करना.... यह एहसास उस नशा जैसा है जब आप किसी की खूबसूरती के कायल हो जाते हैं, और उनकी अदाएं आपको हर जगह अपनी ओर खींचती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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