हवा-ए-मय-कदा ये है तो फ़ौत-ए-वक़्त है ज़ुल्म — मीर तक़ी मीर

हवा-ए-मय-कदा ये है तो फ़ौत-ए-वक़्त है ज़ुल्म नमाज़ छोड़ दें अब कोई दिन गुनाह करें

“If this is the intoxicating wind, then it is the theft of time's curse; / Let someone abandon prayer and commit a sin.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर यह मय की हवा है, तो यह वक़्त का ज़ुल्म है; / कोई दिन नमाज़ छोड़ दे और कोई गुनाह करे।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर का यह शेर दुनियावी और रूहानी ज़िम्मेदारियों के बीच के गहरे तनाव को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि अगर महफ़िल का नशा ही इतना गहरा है, और वक़्त गुज़र रहा है, तो शायद नमाज़ छोड़ देना या गुनाह करना भी एक छोटा गुनाह है। यह न सिर्फ़ एक शेर है, बल्कि जीवन की उलझनों और मोह-माया की बेड़ियाँ हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.