तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का — मीर तक़ी मीर
तुम्हें भी चाहिए है कुछ तो पास चाहत का
हम अपनी और से यूँ कब तलक निबाह करें
“You too desire something, a trace of affection, How long must we sustain this promise from our own heart?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हें भी कुछ चाहत का पास चाहिए, हम अपनी तरफ से और कब तक निभाएँ।
विस्तार
यह शेर उस रिश्ते की थकान और उलझन को बयां करता है, जहाँ एकतरफा देना बहुत मुश्किल हो जाता है। शायर पूछ रहे हैं कि जब चाहत के लिए आपको भी कुछ चाहिए, तो मैं अपनी तरफ से यह निभाना कब तक करूँ? यह एक बहुत ही गहरा सवाल है—कि प्यार में सिर्फ देना काफी नहीं होता, सामने वाले का साथ और प्रयास भी उतना ही ज़रूरी होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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