बे-कसी मुद्दत तलक बरसा की अपनी गोर पर — मीर तक़ी मीर

बे-कसी मुद्दत तलक बरसा की अपनी गोर पर जो हमारी ख़ाक पर से हो के गुज़रा रो गया

“For some long time, let the rain fall upon my body, If you pass over me, even on my ashes, weeping.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

किसी लंबे समय तक, अपनी कब्र पर बारिश बरसा दे, जो हमारी राख से गुज़रते हुए रो गया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की गहरे दर्द और यादों को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जैसे बारिश अपनी कब्र पर बरसती है, यानी गम का स्रोत हमेशा मौजूद रहता है। और जब वह हमारी धूल पर से गुज़रती है, तो रो पड़ती है! इसका मतलब है कि दर्द इतना गहरा है कि समय का गुज़रना, या किसी की याद का गुज़रना भी हमें रुला देता है। यह वियोग का एक बहुत ही ख़ूबसूरत और दर्दभरा चित्रण है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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