क्या कहूँ कैसा सितम ग़फ़लत से मुझ पर हो गया — मीर तक़ी मीर
क्या कहूँ कैसा सितम ग़फ़लत से मुझ पर हो गया
क़ाफ़िला जाता रहा मैं सुब्ह होते सो गया
“What shall I say, what cruel fate has fallen upon me by heedlessness? I kept going along, and fell asleep as dawn broke.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं क्या कहूँ कि ग़फ़लत से मुझ पर कैसा सितम हो गया। क़ाफ़िला चलता रहा और मैं सुबह होते ही सो गया।
विस्तार
यह शेर समय की बर्बादी और गुज़रे हुए लम्हों के अफसोस को बयान करता है। शायर कहते हैं कि मुझ पर जो सितम हुआ, वह किसी और के हाथ से नहीं, बल्कि मेरी अपनी बेख़बरी से हुआ। जैसे ही सुबह हुई, क़ाफ़िला निकल गया, और मैं सो गया। यह एक गहरी आत्म-आलोचना है—कि हम जीवन की रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पाए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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