मुस्तूजिब-ए-ज़ुलम-ओ-सितम-ओ-जौर-ओ-जफ़ा हूँ हर-चंद कि जलता हूँ पे सरगर्म-ए-वफ़ा हूँ

“I am the one who burns with injustice, cruelty, oppression, and betrayal, Yet every moment, I burn with the heat of devotion.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं अन्याय, अत्याचार, क्रूरता, और बेवफाई का सामना करने वाला हूँ, फिर भी हर पल मैं भक्ति की गर्मी से जलता हूँ।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरे विरोधाभास को दिखाता है। शायर कहते हैं कि मैं ज़ुल्म और सितम का मुस्तजिब हूँ... यानी मैं दर्द देने वाला हूँ। लेकिन साथ ही वो कहते हैं कि मैं वफ़ा की आग हूँ! यह एक ऐसी उलझन है जहाँ इंसान अपनी क्रूरता और अपनी वफ़ादारी को एक साथ बयान कर रहा है। यह दिखाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ा दर्द, सबसे बड़ी वफ़ादारी का ही रूप होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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