अर्ज़-ए-वहशत न दिया कर तो बगूले इतनी — मीर तक़ी मीर
अर्ज़-ए-वहशत न दिया कर तो बगूले इतनी
अपनी वादी पे कभू यार भी आ जाते हैं
“If you do not give the address of your sadness, then, my dear, even friends sometimes come to your riverbank.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर तुम उदासी का पता नहीं बताओगे, तो मेरे प्यारे, कभी-कभी दोस्त भी तुम्हारी नदी के किनारे आ जाते हैं।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरी बात कहता है। शायर यहाँ कह रहे हैं कि मुझे अपनी तन्हाई का अफ़साना या दर्द की अर्ज़ी मत दो। वो कहते हैं कि ज़िंदगी का अपना एक वक़्त होता है... जब वक्त पर, अपने दोस्त और अपने यार खुद ही मेरी ज़िंदगी में आ जाएँगे। यह आत्म-निर्भरता का बेहतरीन संदेश है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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पाठ
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