'मीर' साहब भी तिरे कूचे में शब आते हैं लेक — मीर तक़ी मीर

'मीर' साहब भी तिरे कूचे में शब आते हैं लेक जैसे दरयूज़ा-गरी करने गदा जाते हैं

“Even 'Mir' Sahib comes to your street at night, Like someone going to a temple for a sacred offering.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मीर साहब भी तेरे रास्ते में रात को आते हैं, जैसे कोई दरयूजा-गरी करने मंदिर जाता है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस रूहानी मजबूरी को बयां करता है, जो किसी से दूर नहीं रह सकती। मिर्ज़ा मिर्ज़ा कहते हैं कि मैं (या मेरा दिल) भी उस महबूब की गली में रात को आता है। इसकी तुलना दरयूज़ा-गरी से करते हैं, जिसे अपना काम करना ही पड़ता है। इसका मतलब है कि कुछ एहसास और कुछ रिश्ते तो किस्मत के लिखे होते हैं, जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

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