एक बीमार-ए-जुदाई हूँ मैं आफी तिस पर — मीर तक़ी मीर
“I am a patient of separation, and on this ailment, The ones who ask, consume the separated soul.”
अर्थ
मैं जुदाई (विरह) का रोगी हूँ, और इस बीमारी पर पूछने वाले लोग ही बिछड़े हुए प्राण को खा जाते हैं।
विस्तार
यह शेर बिछड़न के दर्द को बड़ी खूबसूरती से बयान करता है। शायर कहते हैं कि मैं तो जुदाई का मरीज़ हूँ, मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। लेकिन असली दर्द तब होता है जब कोई पूछता है। उस सवाल से जो जान पहले ही बिखर चुकी होती है, वह पूछने वाले के सवाल को खा जाती है। यह उस अनकहे, अनसुने दर्द का एहसास है जो सवाल पूछने मात्र से और बढ़ जाता है।
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