वक़्त-ए-ख़ुश उन का जो हम-बज़्म हैं तेरे हम तो — मीर तक़ी मीर

वक़्त-ए-ख़ुश उन का जो हम-बज़्म हैं तेरे हम तो दर-ओ-दीवार को अहवाल सुना जाते हैं

“In the time of joy, those who are with you in the gathering, we are merely those who recount the state of the door and the wall.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जब आप खुशी के समय में महफ़िल में होते हैं, तो हम केवल दरवाज़े और दीवारों की हालत सुनाने वाले होते हैं।

विस्तार

यह शेर उस गहरे जज़्बे की बात करता है, जब कोई इंसान किसी महफ़िल में होता है और उसका दिल इतना उमड़ रहा होता है कि वो अपनी कहानी सिर्फ़ सामने वाले को नहीं, बल्कि पूरी जगह को सुनाने लगता है। शायर कहते हैं कि खुशी और महफ़िल की रौनक में, हम अपने अहवाल इतने खुलेआम बयान कर देते हैं.... जैसे दीवारों को भी पता हो कि हमारे दिल में क्या चल रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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