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खुल जाएँगी फिर आँखें जो मर जाएगा कोई आते नहीं हो बाज़ मिरे इम्तिहाँ से तुम

The eyes will open again, even if someone dies, You do not come from my test, oh my beloved.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरी आँखें फिर से खुल जाएँगी, भले ही कोई मर जाए, तुम मेरे इम्तिहान से नहीं आते।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है, जब इंसान को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, तब कोई अपना साथ नहीं देता। शायर कहते हैं कि मेरी आँखें तभी खुलेंगी... जब कोई मर जाएगा, यानी जब दर्द अपने चरम पर होगा। और दूसरी लाइन में ये इल्ज़ाम है कि तुम कभी मेरे इम्तिहाँ से नहीं गुज़रकर आए। यह पूरी बात अकेलेपन के उस दर्द को बयान करती है, जहाँ आपको सबसे ज़्यादा सहारे की ज़रूरत होती है, और वो सहारा भी नहीं मिलता।

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