जितने थे कल तुम आज नहीं पाते इतना हम — मीर तक़ी मीर
जितने थे कल तुम आज नहीं पाते इतना हम
हर-दम चले ही जाते हो आब-ए-रवाँ से तुम
“As many you were yesterday, today you do not have; / You continue to flow, like the ever-moving stream.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कल जितने थे, आज उतने नहीं हैं; तुम हरदम बहते रहते हो, जैसे बहता पानी।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर इस शेर में वक़्त के गुज़रने का दर्द बयां करते हैं। शायर कहते हैं कि जो चीज़ें कल थीं, आज नहीं हैं, और यह सब एक बहती नदी की तरह होता है। 'आब-ए-रवाँ' का मतलब है बहता पानी, जो समय का प्रतीक है। यह शेर हमें सिखाता है कि ज़िंदगी और मोहब्बत, दोनों ही बहुत नश्वर हैं.... और इस बदलाव को स्वीकार करना ही सबसे बड़ी कला है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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