जाओ न दिल से मंज़र-ए-तन में है जा यही — मीर तक़ी मीर
“Do not leave from the sight of my heart, for this very dwelling place of mine, you will regret if you ever leave.”
अर्थ
जाओ न दिल से मंज़र-ए-तन में है जा यही। पछताओगे उठोगे अगर इस मकाँ से तुम। (अर्थात: मेरे दिल से दूर मत जाना, क्योंकि यह शरीर ही मेरा घर है, और अगर तुम मुझसे दूर हो गए तो तुम्हें इसका बहुत पछतावा होगा।)
विस्तार
यह शेर एक विदाई का बहुत ही गहरा और दर्द भरा एहसास है। शायर कह रहे हैं कि तुम अपने दिल से ये यादें... ये मंज़र मत लेकर जाना। यह दिल एक मकाँ बन चुका है... और जब तुम यहाँ से जाओगे, तो तुम्हें इस जगह का बहुत पछतावा होगा। यह बस एक चेतावनी है... कि बिछड़ना कितना मुश्किल होगा!
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