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क्या जानते थे ऐसे दिन आ जाएँगे शिताब
रोते गुज़रतियाँ हैं हमें रातें सारियाँ

Who knew that days like these would arrive, the chill; / Our nights are all spent weeping, it is true.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

शायर को नहीं पता था कि ऐसे दिन आ जाएँगे, जब रातें रोते हुए गुज़रती हैं।

विस्तार

यह शेर अचानक आए गम की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि कभी ऐसे कड़ाके के दिन आ जाएँगे। ये 'शिताब' सिर्फ़ ठंड नहीं, बल्कि दिल का दर्द है। और जब हर रात रोते हुए गुज़रती है, तो यह एक बहुत गहरा, सार्वभौमिक दुःख है। यह वक़्त के बदलते मिज़ाज को बयां करता है।

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