उस सीम-बदन को थी कब ताब-ए-ताब इतनी वो चाँदनी में शब की होता तो पिघल जाता

“That delicate form never possessed such an intense glow, If it were in the moonlight night, it would have melted away.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

उस नाज़ुक रूप में कभी इतना तेज़ दमक नहीं थी, अगर वो चाँदनी रात में होता तो पिघल जाता।

विस्तार

यह शेर उस खूबसूरती का वर्णन करता है जो इतनी स्वाभाविक और तीव्र हो कि उसे किसी प्रयास की ज़रूरत ही न पड़े। शायर पूछ रहे हैं कि आपको इतनी 'ताब-ए-ताब' की क्या ज़रूरत थी? अगर आप बस चाँदनी में होतीं, तो आपकी सुंदरता इतनी निखर जाती कि आप पिघल जातीं। यह एक ऐसी कमाल की खूबसूरती है जो अपने आप में ही पूरी है।

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