बे-ताब-ओ-तवाँ यूँ मैं काहे को तलफ़ होता
याक़ूती तिरे लब की मिलती तो सँभल जाता
“Why should I be so restless and agitated for you? If I could find the sapphire of your lips, I would be composed.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे बेचैन और व्याकुल, मैं तुम्हारा इतना क्यों तल्ख़ होता? काश! मुझे तुम्हारे होंठों का नीलम मिल जाए, तो मैं शांत हो जाऊँगा।
विस्तार
यह शेर आशिक़ की उस हालत को बयां करता है, जब दिल बेचैन हो और मन को कोई सुकून न मिले। शायर पूछते हैं कि यह बेताब होना किस बात का है? उनका कहना है कि अगर उन्हें महबूब के याक़ूत जैसे होंठ मिल जाएं, तो उनकी बेचैनी अपने आप शांत हो जाएगी। यह सिर्फ़ एक एहसास है, जो बताता है कि सुकून महबूब की नज़दीकी में है।
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