बिन पूछे करम से वो जो बख़्श न देता तो
पुर्सिश में हमारी ही दिन हश्र का ढल जाता
“If he had not bestowed favor without asking, who would have let our days perish in despair?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बिना पूछे कृपा से वह जो प्रदान नहीं करता, तो हमारी ही विनती में जीवन का अंत हो जाता।
विस्तार
इस शेर में इश्क़ की वो गहराई है जहाँ आशिक़ का वजूद पूरी तरह महबूब की मेहरबानी पर टिका है। शायर कहते हैं कि अगर वो बिन माँगे करम न देते, तो हमारी ज़िंदगी का क्या हाल होता! वो अपनी भावनाओं को इस तरह बयां करते हैं कि हश्र के दिन का गुजरना भी आसान लगता है। यह वफ़ा और ज़रूरत का एक ऐसा संगम है, जो सिर्फ़ महबूब के एहसान से ही मुमकिन है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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