मैं गिर्या-ए-ख़ूनीं को रोके ही रहा वर्ना
इक दम में ज़माने का याँ रंग बदल जाता
“If I had not stopped the bloody mountain, The colors of the world would have changed in a moment.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर मैं ख़ूनी पहाड़ को नहीं रोक रहा होता, तो दुनिया का रंग एक पल में बदल जाता।
विस्तार
इस शेर में एक बहुत गहरा एहसास है। शायर कह रहे हैं कि उनका दर्द, उनका ग़म.... इतना ज़्यादा है कि वह सिर्फ़ उनका नहीं है। ये आँसू, ये ग़म.... ये सिर्फ़ उनकी निजी बात नहीं है। अगर ये आँसू बहने लगें, तो इसका असर पूरे ज़माने पर पड़ेगा! मतलब, उनका दुःख इतना बड़ा है कि दुनिया का मिज़ाज ही बदल जाएगा।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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