हैं घाव दिल पर अपने तेग़-ए-ज़बाँ से सब की — मीर तक़ी मीर
हैं घाव दिल पर अपने तेग़-ए-ज़बाँ से सब की
तब दर्द है हमारे ऐ 'मीर' हर सुख़न में
“From the wound inflicted by your tongue's sharp sword, my heart is pierced;\Oh Mir, pain resides in every single utterance of ours.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे दिल पर हर किसी की ज़बान की तलवार से घाव हैं; ऐ मीर, हमारे हर एक कथन में दर्द है।
विस्तार
यह शेर बताता है कि दिल के घाव कहाँ से होते हैं। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि हमारे दिल पर जो ज़ख़्म हैं, वे किसी तलवार से नहीं, बल्कि लोगों की ज़ुबान की धार से मिले हैं। यह दर्द इतना गहरा है कि अब हर एक बात, हर एक लफ़्ज़ में हमें यह दर्द महसूस होता है। यह सिर्फ़ बातों का ज़हर है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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