कपड़े गले के मेरे न हों आब-दीदा क्यूँ मानिंद-ए-अब्र दीदा-ए-तर अब तो छा गया

“Why should my neck be covered by clothes, O beloved? Your vision, like a rain cloud, has now spread over me.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरे गले पर कपड़े क्यों हों, ऐ प्रिय? तुम्हारा नज़ारा, बादल की तरह, अब मुझ पर छा गया है।

विस्तार

यह शेर ग़म और इश्क़ की एक बहुत ही नाज़ुक सी तस्वीर खींचता है। शायर कह रहे हैं कि मेरे कपड़ों पर आँसू का पहुँचना कोई बड़ी बात नहीं.... लेकिन जिस तरह की उदासी, जिस तरह की बादल जैसी आँखों का नज़ारा है.... वह तो पूरे माहौल पर छा गया है! यह सिर्फ आँसुओं की बात नहीं है, यह उस ग़म के पूरे एहसास की बात है जो आँखों में समा गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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