देखा हो कुछ उस आमद-ओ-शुद में तो मैं कहूँ
ख़ुद गुम हुआ हूँ बात की तह अब जो पा गया
“If I saw something in that arrival and departure, I would say, I am lost in the depths of the conversation I have now found.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर मैंने उस आगमन और प्रस्थान में कुछ देखा होता, तो मैं कहूँगा कि मैं अब बात की तह में खुद खो गया हूँ।
विस्तार
मीर तक़ी मीर ने यहाँ एक गहरे एहसास को बयां किया है। शायर कह रहे हैं कि अगर आपने जीवन के इस आने-जाने, इस आमद-ओ-शुद को देखा है, तो मेरी बात सुनिए। वो मानते हैं कि जिस पल उन्हें इस बात की तह तक पहुँचने का अहसास हुआ, वो ख़ुद ही उसमें गुम हो गए। यह एक बहुत ही नज़ाकत भरा इक़रार है कि जब आप किसी चीज़ को गहराई से समझ जाते हैं, तो आप खुद उस एहसास में खो जाते हैं।
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