जाँ-सोज़ आह ओ नाला समझता नहीं हूँ मैं
यक शो'ला मेरे दिल से उठा था जला गया
“O heart-burning sigh, oh river, I do not understand you, A flame that arose from my heart, it has burned me.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जाँ-सोज़ आह ओ नाला, मैं तुम्हें समझ नहीं पाता; यह शो'ला मेरे दिल से उठा था और मुझे जला गया।
विस्तार
यह शेर अंदरूनी दर्द और उलझन को बयां करता है। शायर यहाँ उस दर्द से बात कर रहे हैं, जिसे वे समझ नहीं पा रहे हैं। यह शो'ला, यह आग, बाहर से नहीं आई थी.... यह तो उनके अपने दिल से उठी थी। इसका मतलब है कि कई बार, सबसे बड़ा दर्द कोई बाहरी चीज़ नहीं होती, बल्कि वो जुनून या भावना होती है जो हम खुद पैदा कर देते हैं और फिर उसे समझ नहीं पाते।
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