जीते जो ज़ोफ़ हो कर ज़ख़्म-रसा से उस के — मीर तक़ी मीर

जीते जो ज़ोफ़ हो कर ज़ख़्म-रसा से उस के सीने को चाक देखा दिल को फ़िगार पाया

“He who was healed by the wound-remedy, by his chest, he saw the mirror; by his heart, he found the lover.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जिस व्यक्ति को घाव-उपचार से ठीक किया गया, उसने उसके सीने में आईना देखा; और उसके दिल में प्रेमी को पाया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के गहरे एहसास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जीवन में चाहे कितने भी ज़ख्म हों, चाहे दर्द ही दर्द हो... लेकिन जब आप उस महबूब को देखते हैं, तो एक ऐसी खूबसूरती नज़र आती है, एक ऐसा फ़िगार मिलता है... जो सारे दर्द को भुला देता है। यह इश्क़ के उस जादू को बयां करता है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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