कब 'मीर' बसर आए तुम वैसे फ़रेबी से
दिल को तो लगा बैठे लेकिन न लगा जाना
“O Meer, do not come from such a deceptive source, Though my heart has attached itself, do not let it be lost.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर से कहते हैं कि वे किसी ऐसे धोखेबाज़ स्रोत से न आएं, क्योंकि दिल तो लग चुका है, लेकिन उसे खोने न दें।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है जब किसी पर भरोसा टूटता है। शायर यहां अपने महबूब से कह रहे हैं कि आप अपनी राहें क्यों बदलते रहते हैं। वह पूछते हैं कि कब आप एक जगह ठहरेंगे, क्योंकि उन्होंने अपना दिल तो आपको सौंप दिया है, लेकिन ये न हो कि आप उन्हें फिर से धोखा दे दें। यह एक चेतावनी और एक विरह की पुकार है।
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