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बरसों से मिरे उस की रहती है यही सोहबत
तेग़ उस को उठाना तो सर मुझ को झुका जाना

For years, this companionship of hers has stayed with me, To raise that sword of hers, I would have to bow my head.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

बरसों से मेरे उस की यही सोहबत है, कि उसका तेग उठाना तो सर को झुकाना है।

विस्तार

यह शेर उस गहरे लगाव की बात करता है, जो आदत बन जाता है। शायर कहते हैं कि वर्षों से ये महबूब की संगत उनके लिए इतनी स्वाभाविक हो गई है कि अब उससे लड़ना नामुमकिन है। क्योंकि, अगर उन्होंने कभी भी उसे चुनौती देने की कोशिश की, तो उन्हें अपना सिर झुकाना पड़ेगा... और यह झुकाव, यह हार, उनके लिए सबसे बड़ी पीड़ा होगी।

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