लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना कब ख़िज़्र ओ मसीहा ने मरने का मज़ा जाना

“The beloved's heart is not empty of delight, my dear ones, When did Khizr or the Messiah ever know the taste of dying?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जानों का खपा जाना (जानने का मज़ा) यानी जीवन का आनंद लेना, और खिज़्र व मसीहा ने कभी मरने का मज़ा नहीं जाना।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी और रूहानियत के गहरे फ़लसफ़े को बयान करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी का गुज़ारा महज़ लज़्ज़त के लिए नहीं होता, और न ही यह सिर्फ़ जीने की जद्दोजहद है। वह एक सवाल पूछते हैं—ख़िज़्र और मसीहा ने मरने का मज़ा कब जाना? इसका मतलब है कि जो लोग सच्चे ज्ञान को प्राप्त कर लेते हैं, वे दुनियावी नशा और मौत के फ़र्क़ से ऊपर उठ चुके होते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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