मुश्त-ए-नमक की ख़ातिर इस वास्ते हूँ हैराँ — मीर तक़ी मीर

मुश्त-ए-नमक की ख़ातिर इस वास्ते हूँ हैराँ कल ज़ख़्म-ए-दिल निहायत दिल को मिरे लगा था

“For the sake of the salt-stained tears, I am astonished and bewildered, Yesterday, the wound of my heart seemed incredibly deep to me.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

नमक के आँसुओं के लिए मैं इस कारण हैरान हूँ; कल दिल का घाव मेरे लिए बहुत गहरा लगा था।

विस्तार

यह शेर गहरे भावनात्मक आघात की बात करता है। शायर कहते हैं कि 'मुश्त-ए-नमक' (तड़प के नमक) की वजह से वह हैरान है। उसका मानना है कि कल जो ज़ख्म उसे मिले, वे उसके दिल को सहने लायक नहीं थे। यह एक बहुत ही गहरा दर्द है, जो दिखाता है कि दिल पर चोट का असर कितना गहरा हो चुका है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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