सो बख़्त-ए-तीरा से हूँ पामाली-ए-सबा में — मीर तक़ी मीर

सो बख़्त-ए-तीरा से हूँ पामाली-ए-सबा में उस दिन के वास्ते मैं क्या ख़ाक में मिला था

“From your fortune, I was in the play of the morning breeze; on that day, what did I find in the dust?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं तुम्हारे भाग्य से सुबह की हवा के खेल में था; उस दिन के लिए मैंने धूल में क्या पाया था।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी की नश्वरता और उम्मीदों के टूटने का बेहतरीन नज़ारा पेश करता है। शायर कह रहे हैं कि मैं तो आपके 'किस्मत की धूल' और 'सुबह की राख' में ही जीना सीख चुका हूँ। तो फिर... उस एक दिन के लिए, मैं इतनी मेहनत से 'मिट्टी' में क्यों मिल रहा था? यह उन सपनों की बात है, जो बस एक दिन के लिए होते हैं, और फिर हमेशा के लिए बिखर जाते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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