ता-ब-जाँ मा हमरहीम व ता-ब-मंज़िल दीगराँ
फ़र्क़ बाशद जान-ए-मा अज़-आश्ना ता-आश्ना
“In the town, my beloved and the town, my destination are different; oh life, the difference between the known and the unknown is great.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ता-ब-जाँ में हमरहीम और ता-ब-मंज़िल भीगराँ हैं; जान-ए-मा, ज्ञात और अज्ञात के बीच का अंतर बहुत बड़ा है।
विस्तार
यह शेर आराम और अनजानेपन के बीच के तनाव को दर्शाता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि भले ही महबूब हमेशा साथ रहे.... लेकिन जीवन की मंज़िल कुछ और है। वो कहते हैं कि जान-ए-मा को हर हाल में अलग रहना चाहिए—जो जाना-पहचाना है और जो अभी पता नहीं चला है.... यह एक तरह का संतुलन बनाए रखने का दर्द है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
