Sukhan AI
ज़िक्र-ए-गुल क्या है सबा अब कि ख़िज़ाँ में हम ने
दिल को नाचार लगाया है ख़स ओ ख़ार के साथ

What is the mention of flowers, O dawn, now that in autumn we have / Hung our hearts with both the musk and the thorn.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे सुबह, अब फूलों का ज़िक्र क्या है, क्योंकि हमने तो दिल को कस्तूरी और कांटे दोनों से सजाया है।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जो इश्क़ में होता है। शायर कहते हैं कि जब ज़िंदगी का मौसम ख़िज़ाँ जैसा हो जाए, तो फूलों का ज़िक्र करना क्या मतलब? क्योंकि हमने अपना दिल सिर्फ़ गुलाब की ख़ुशबू से नहीं, बल्कि उसके काँटों के दर्द से भी जोड़ लिया है। यह एक गहरी समझ है कि सच्चा प्यार कभी भी पूरी तरह मीठा नहीं होता; इसमें दर्द और तड़प का मेल ज़रूर होता है।

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