जिस से खोई थी नींद 'मीर' ने कल — मीर तक़ी मीर
जिस से खोई थी नींद 'मीर' ने कल
इब्तिदा फिर वही कहानी की
“From which sleep 'Mir' lost yesterday, He began the same story again.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिस चीज से 'मीर' ने कल अपनी नींद खोई थी, उससे ही आज फिर कहानी शुरू हो गई।
विस्तार
यह शेर उस दर्द को बयान करता है जो कभी खत्म नहीं होता। शायर कहते हैं कि भले ही हमने कल रात की तकलीफ से अपनी नींद खो दी हो, पर इस कहानी का जो इब्तिदा (शुरुआत) है, वह आज भी वैसा ही है। यह एहसास दिलाता है कि कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कभी पूरी तरह से जाते नहीं, वे बस एक ठहराव लेते हैं और फिर उसी दर्द के साथ लौट आते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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