इश्क़ मा'शूक़ इश्क़ आशिक़ है
या'नी अपना ही मुब्तला है इश्क़
“The beloved's love is the lover's love, Meaning, the love itself is the one afflicted.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
इश्क़ (प्रेम) माशूक़ (प्रियतम) इश्क़ (प्रेम) आशिक़ (प्रेमी) है, यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़। इसका शाब्दिक अर्थ है कि प्रेम में प्रियतम का प्रेम और प्रेमी का प्रेम एक ही है, यानी प्रेम स्वयं ही सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाला है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की प्रेम की गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि इश्क़, माशूक़ और आशिक़—ये सब एक ही धागे में बंधे हैं। इसका मतलब है कि न महबूब है, न महबूब का इश्क़, न आशिक़ का इश्क़... ये सब तो बस इश्क़ की ही मुब्तिला (पीड़ित) अवस्था है। यह एहसास दिलाता है कि इश्क़ में सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं!
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