पुर-ग़ुबारी-ए-जहाँ से नहीं सुध 'मीर' हमें गर्द इतनी है कि मिट्टी में रुले जाते हैं

“From the dust-bath of the world, 'Mir', we have lost our senses; / Our grime is so deep that we weep into the earth.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

दुनिया के धूल-धूसरपन से 'मीर' हमें होश खो बैठे हैं; / हमारी गंदगी इतनी गहरी है कि हम मिट्टी में रोने लगते हैं।

विस्तार

यह शेर गहरे दर्द और निराशा को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि दुनिया की कोई भी धूल, कोई भी परेशानी हमें विचलित नहीं करती। हमारा गम इतना गहरा है कि हम अपनी ही पीड़ा में मिट्टी में रोने लगते हैं। यह बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि दिल के अंदर के टूटने से उपजा दर्द है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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