क्या डुबाया मुहीत में ग़म के — मीर तक़ी मीर
क्या डुबाया मुहीत में ग़म के
हम ने जाना था आश्ना है इश्क़
“What sorrow did we drown in the lake of my heart? We had known that love was a beloved companion.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैंने क्या मेरे हृदय के सरोवर में ग़म डुबो दिए? हम तो जानते थे कि इश्क़ एक प्रिय सखा है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस उलझन को बयां करता है, जहाँ दर्द भी अपना सा लगने लगता है। शायर पूछ रहे हैं कि आपने ग़म के समंदर में क्या डुबो दिया? लेकिन दूसरी लाइन में एक अजीब सा सुकून है—कि हमें इश्क़ तो पहले से मालूम था। ऐसा लगता है कि चाहे दर्द कितना भी गहरा हो, ये रिश्ता इतना गहरा है कि हर गम, हर तड़प, जानी-पहचानी लगती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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