गुल-बार करे हैगा असबाब-ए-सफ़र शायद — मीर तक़ी मीर
“Perhaps the arrangement of the journey is to bloom like a garden, / The heart-stealing gaze of the nightingale appeared like a bud.”
अर्थ
शायद गुल-बार (फूलों का बगीचा) में सफर का सामान रखा है; गूँजे की तरह बुलबुल की दिल-मोहक नज़र दिखाई दी।
विस्तार
यह शेर अचानक हुए प्रेम के प्रभाव को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि शायद यह महकती बाग़बानी (गुल-बार) किसी सफ़र की तैयारी कर रही है। लेकिन शायर का ध्यान एक बुलबुल पर है, जो ग़ुंचे की तरह नज़दीक आया है। यह बुलबुल महबूब की खूबसूरती का प्रतीक है, जो दिल को मोह लेता है। यह बताता है कि कभी-कभी, सबसे ख़ूबसूरत मुलाकातें भी एक ठहराव और एक सफ़र की कहानी कहती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
