मग़रूर बहुत थे हम आँसू की सरायत पर — मीर तक़ी मीर

मग़रूर बहुत थे हम आँसू की सरायत पर सो सुब्ह के होने को तासीर नज़र आई

“We were very proud at the station of tears, / But the effect of the coming morning was visible.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हम आँसुओं के पड़ाव पर बहुत घमंडी थे, लेकिन आने वाली सुबह का असर दिखाई दिया।

विस्तार

यह शेर भावनात्मक थकान और उम्मीद के सही समय को समझाता है। शायर कहते हैं कि हम अपने आँसुओं के कारवां पर बहुत घमंड में थे। हम इतने गहरे ग़म में थे कि हमें सुबह होने के संकेत भी नज़र नहीं आए। हम रात के गम में इतने डूबे थे कि सुबह की खूबसूरत रोशनी का एहसास ही नहीं कर पाए। यह ग़म की वजह से आँखों पर पड़ सकने वाली एक गहरी बात है।

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