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अंजाम-ए-कार बुलबुल देखा हम अपनी आँखों
आवारा थे चमन में दो चार टूटे पर से

We saw the outcome of our work, like the nightingale, with our own eyes; we were wanderers from a few broken spots in the garden.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हमारी अपनी आँखों से हमने अपने काम का अंजाम, बुलबुल की तरह देखा; हम बगीचे में दो-चार टूटे हुए स्थानों पर आवारा थे।

विस्तार

यह शेर दर्द-ए-इश्क़ की उस कड़वी सच्चाई को बयां करता है, जब आशिक़ को अपने ही नैनों से महबूब या अपने दिल का अंजाम देखना पड़ता है। शायर कहते हैं कि मैं तो उस बाग़ में आवारा हूँ, जो टूटे हुए टुकड़ों से भरा है.... क्योंकि मैंने मोहब्बत का जो आख़िरी मंज़र देखा, वह बहुत दर्दनाक था!

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