दाग़ एक हो जिला भी ख़ूँ एक हो बहा भी अब बहस क्या है दिल से क्या गुफ़्तुगू जिगर से

“A stain is one, and the blood that flows is one; Now what argument is there, what discourse from heart to liver?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

दाग़ एक है, और बहता ख़ूँ भी एक है; अब दिल से क्या बहस है, क्या गुफ़्तुगू जिगर से।

विस्तार

यह शेर भावनात्मक समर्पण की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि अगर एक दाग़ (याद) जीना सिखा दे, और एक ख़ूँ बहना ज़रूरी लगे... तो अब बहस किस बात की? दिल और जिगर के बीच अब और क्या गुफ़्तुगू बाकी है? यह उस पल का ज़िक्र है जब दर्द को पूरी तरह स्वीकार कर लिया जाता है, और मन की उलझनें ख़त्म हो जाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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