दीदार ख़्वाह उस के कम हों तो शोर कम हो
हर सुब्ह इक क़यामत उठती है उस के दर से
“If the longing to see her lessens, the noise will diminish, Every morning a catastrophe rises from her threshold.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर उससे मिलने की चाहत कम हो जाए, तो शोर भी कम हो जाएगा। हर सुबह उसके द्वार से एक तबाही उठती है।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस दर्द को बयान करता है, जो कभी खत्म नहीं होता। शायर कहते हैं कि अगर दीदार की चाहत कम हो जाए, तो शोर भी कम हो जाएगा। लेकिन यहाँ शायर एक गहरी बात कह रहे हैं... कि माशूक़ का बस एक साया भी, हर सुबह एक नई क़यामत लेकर आता है! यह प्रेम नहीं, यह एक ज़िन्दगी है... जिसमें हर पल तड़प है और हर सुबह एक नया हंगामा!
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
