लिखते रुक़ा लिखे गए दफ़्तर — मीर तक़ी मीर

लिखते रुक़ा लिखे गए दफ़्तर शौक़ ने बात क्या बढ़ाई है

“The desk where I paused writing, the letters that were written, What has the passion increased in the conversation?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

लिखते-पढ़ा दफ़्तर (मेज) और लिखे गए ख़त, शौक़ ने बात में क्या बढ़ा दी है।

विस्तार

यह शेर उस जुनून की बात करता है जो हमें लिखने पर मजबूर कर देता है। शायर कह रहे हैं कि नज़्म और रुक़ा लिखते-लिखते पूरा दफ़्तर भर गया है.... और ये सब बस एक 'शौक़' की वजह से हुआ है। यह जुनून कितना गहरा और कितना बड़ा है, यह शायर खुद से पूछ रहे हैं। यह कला के उस वज़न को बयां करता है जो कभी-कभी इंसान पर हावी हो जाता है।

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