मर्ग-ए-मजनूँ से अक़्ल गुम है 'मीर' — मीर तक़ी मीर
मर्ग-ए-मजनूँ से अक़्ल गुम है 'मीर'
क्या दिवाने ने मौत पाई है
“From the path of Majnun, reason is lost, O Meer, Has any lover found death?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मजनू के मार्ग से पागलपन आ गया है, मीर। क्या किसी प्रेमी को मौत मिल पाई है?
विस्तार
यह शेर इश्क़ और ज़िंदगी के गहरे फ़लसफ़े को छूता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि बस महबूब के रास्ते पर चलने से ही अक़्ल गुम हो जाती है। और फिर वह पूछते हैं—क्या इस दीवाने ने सच में मौत पा ली है? यह एक गहरा सवाल है जो बताता है कि जुनून और इश्क़ की गहराई मौत से भी ज़्यादा असरदार हो सकती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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