किया मैं ने रो कर फ़िशार-ए-गरेबाँ — मीर तक़ी मीर
“Having cried, I broke the spring of the stranger's heart, The vein of the cloud was ripped by the stranger's whim.”
अर्थ
रोकर मैंने परदेसी के दिल का दबाव (फ़िशार) तोड़ा, और परदेसी के मन के whim से बादल की नस (रग) तार-तार हो गई।
विस्तार
यह शेर विरह और अकेलेपन के दर्द को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब मैंने रोया, तो मेरे 'गरेबाँ' (परदेस) का रास्ता ही टूट गया। इसका मतलब है कि दिल का दर्द इतना गहरा था कि आँसुओं ने न सिर्फ़ आँखें नहीं, बल्कि उस इंसान की तन्हाई की बुनियाद को ही हिला दिया। यह एक दिल टूटने का दर्द है।
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