नैरंग हुस्न-ए-दोस्त से कर आँखें आश्ना
मुमकिन नहीं वगरना हो दीदार एक तरह
“From the friend's beauty, my eyes have grown familiar, It is impossible to remain without a glimpse of you.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दोस्त के हुस्न से मेरी आँखें परिचित हो गई हैं, इसलिए एक झलक के बिना रहना मुमकिन नहीं है।
विस्तार
यह शेर महबूब की सुंदरता की ऐसी ताक़त की बात करता है, जो एक नज़र में भी क़ब्र तक पहुंचा दे। शायर अपने दोस्त से कह रहे हैं कि मेरी आँखों को धीरे-धीरे मेरे हुस्न से रूबरू करा दे.... वर्ना एक झलक भी बर्दाश्त नहीं होगी! यह एक नज़ाकत भरी गुज़ारिश है कि मेरी खूबसूरती इतनी ज़्यादा है कि इसे धीरे-धीरे देखना ज़रूरी है।
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