गह गुल है गाह रंग गहे बाग़ की है बू आता नहीं नज़र वो तरह-दार एक तरह

“The garden is lovely, the colors are deep, and the fragrance of the garden is sweet, But the sight of that beloved is not the same as before.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

गह गुल है गाह रंग गहे बाग़ की है बू, अर्थात् बाग़ के फूल और रंग बहुत सुंदर हैं और उसकी खुशबू भी मनमोहक है, लेकिन जिस प्रियजन को शायर ने देखा है, उसका रूप और नज़ारा पहले जैसा नहीं रहा।

विस्तार

यह शेर खूबसूरती से उस विरोधाभास को बयान करता है जो जीवन में होता है। शायर कहते हैं कि हर जगह सुंदरता है, हर कोने में फूल हैं, हर रंग में रौनक है। लेकिन इतनी सारी खूबसूरती के बावजूद, उन्हें वह एक खास, अनूठी चीज़ नहीं मिल रही जो उनके दिल को सुकून दे। यह उस खोज को दर्शाता है जब आप जानते हैं कि सुंदरता मौजूद है, पर वह 'परफेक्ट' चीज़ कहीं नहीं मिल रही।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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