घर उस के जा के आते हैं पामाल हो के हम करिए मकाँ ही अब सर-ए-बाज़ार एक तरह

“We return from his house, while we are in a state of intoxication; We shall make a home now, in the marketplace, in a way.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हम उसके घर से ऐसे लौटते हैं जैसे नशे में हों; अब हम बाज़ार में ही एक तरह से अपना घर बसा लेंगे।

विस्तार

देखिए, यह शेर इश्क़ के उस नशा और उस थकावट को बयान करता है, जो महबूब के घर से लौटकर महसूस होती है। शायर कहते हैं कि दिल टूटकर, पामाल होकर हम लौटते हैं। लेकिन इस दर्द में भी एक अजीब सी शान है—जैसे हमारा छोटा सा ठिकाना भी अब बाज़ार का सर बन गया है! यह प्रेम के उस गहरे, विडंबना भरे एहसास को बयां करता है।

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घर उस के जा के आते हैं पामाल हो के हम | Sukhan AI