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मर जाएगा बातों में कोई ग़म-ज़दा यूँ ही
हर लहज़ा न हो मुम्तहिन अरबाब-ए-वफ़ा का

Someone will perish in talk, a sorrowful soul, just like this, Not every utterance can be tested by the lords of faithfulness.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

बातचीत में कोई गमगीन व्यक्ति यूँ ही मर जाएगा, हर बात वफ़ा के आदमियों द्वारा परखी नहीं जा सकती।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है.... यह बताता है कि किसी ग़म-ज़दा (उदासी से भरा) दिल को सिर्फ बातों से ग़म नहीं होता। बल्कि, वफ़ा के सच्चे आशिकों की परीक्षा तो हर एक लहजे में होती है। शायर समझाते हैं कि वफ़ा का इम्तिहान सिर्फ़ बड़े वादों में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की बातों की सादगी में छिपा होता है।

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