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ग़ैर के कहने से मारा उन ने हम को बे-गुनाह ये समझा वो कि वाक़े' में भी कुछ था या था

They killed us as innocent, by the saying of others, They did not realize that there was something in reality, or not.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दूसरों की बातों से उन्होंने हमें निर्दोष मार दिया, पर यह नहीं समझा कि वास्तव में कुछ था या नहीं।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की ज़ुबान से निकलता है, जो ग़लतफ़हमी के दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि लोग महज़ ग़ैर के कहने से हमें बेगुनाह साबित करके मार देते हैं। सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें कभी समझ नहीं आया कि असलियत में क्या था या क्या नहीं था। यह इंसानी नज़रों की बेबुनियादी आलोचना पर एक गहरा तंज़ है।

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