सुब्ह होते वो बिना-गोश आज याद आया मुझे
जो गिरा दामन पे आँसू गौहर-ए-यक-दाना था
“When morning came, I remembered you, without any meat, The tear that fell upon the lap was a single pearl.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
सुबह होते ही वो बिना-गोश आज याद आया मुझे, जो गिरा दामन पे आँसू गौहर-ए-यक-दाना था। इसका शाब्दिक अर्थ है कि सुबह होते ही मुझे वो बिना-गोश याद आया, जिसके दामन पर गिरा आँसू एक मोती के समान था।
विस्तार
यह शेर यादों और दर्द की गहराई को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि कभी-कभी किसी का ज़िक्र इतना अमूर्त होता है कि उसके चेहरे की कोई पहचान नहीं बचती। बस एक आँसू बनकर रह जाता है—एक मोती की तरह। यह दर्शाता है कि सबसे गहरे एहसास अक्सर बिना किसी रूप या पहचान के होते हैं, बस एक दर्द भरी याद बनकर रह जाते हैं।
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